Government Scheme Awareness
औद्योगिक विकास और उद्यम के लिए भारत सरकार की अनुदानित योजनाएँ एवं सहायता वाली योजनाएँ कौन-कौन सी हैं?
यदि आप नया उद्योग शुरू करना चाहते हैं या अपने MSME का विस्तार करना चाहते हैं, तो भारत सरकार की प्रमुख अनुदान (Subsidy), ऋण (Loan) और सहायता योजनाएँ निम्न हैं:
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
- नया उद्योग शुरू करने के लिए।
- विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा (Service) दोनों क्षेत्रों के लिए।
- पात्रता के अनुसार बैंक ऋण पर 15% से 35% तक सब्सिडी मिल सकती है।
CGTMSE
- MSME को बिना संपार्श्विक (Collateral) बैंक ऋण दिलाने में सहायता।
- सरकार बैंक को क्रेडिट गारंटी देती है, जिससे ऋण प्राप्त करना आसान होता है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)
- छोटे व्यवसायों के लिए ऋण।
- शिशु, किशोर और तरुण श्रेणियों में ऋण उपलब्ध।
स्टार्टअप इंडिया
- नवाचार आधारित स्टार्टअप के लिए।
- टैक्स लाभ, फंडिंग सहायता और मेंटरशिप जैसी सुविधाएँ।
ASPIRE
- ग्रामीण उद्योग, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए।
MSE-CDP
- औद्योगिक क्लस्टर, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए सहायता।
SFURTI
- पारंपरिक उद्योगों जैसे खादी, हस्तशिल्प और ग्रामोद्योग के विकास के लिए।
RAMP
- MSME की प्रतिस्पर्धात्मकता, गुणवत्ता और क्षमता बढ़ाने के लिए सहायता।
राष्ट्रीय SC-ST हब
- अनुसूचित जाति एवं जनजाति के उद्यमियों के लिए विशेष सहायता, प्रशिक्षण और बाज़ार समर्थन।
उद्यम पंजीकरण ( Udyam Registration)
- MSME के रूप में पंजीकरण कराने पर विभिन्न सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और टेंडर लाभों का लाभ मिलता है।
यदि आप उत्तर प्रदेश में उद्योग लगाना चाहते हैं, तो केंद्र सरकार की योजनाओं के अलावा राज्य सरकार की MSME नीति, ODOP और अन्य प्रोत्साहन योजनाओं का भी लाभ मिल सकता है।
Government Scheme Awareness
Government Schemes Awareness (सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता) का उद्देश्य नागरिकों, उद्यमियों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और MSMEs को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देना है, ताकि वे उनका लाभ उठा सकें।
मुख्य उद्देश्य
जागरूकता कार्यक्रमों में क्या बताया जाता है?
उद्योग एवं MSME से संबंधित प्रमुख योजनाएँ
लाभ
•योजनाओं का अधिक से अधिक लाभार्थियों तक पहुँचना।
•नए उद्योग और व्यवसाय स्थापित होने में सहायता।
•रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ना।
•उद्यमियों की वित्तीय एवं तकनीकी सहायता तक पहुँच आसान होना।
•देश में समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलना।

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